
कोरबा। प्रदेश में पर्यटन स्थल की रूप में अपनी पहचान बना चुके सतरेंगा के जंगल में पेड़ों की कटाई व लकड़ी तस्करी का कारोबार फल फूल रहा था। इस बात का खुलासा उस वक्त हुआ, जब वन विभाग की टीम ने एक साथ छह अलग अलग घरों में दबिश दी। जिसमें एक सरकारी शिक्षक का मकान भी शामिल है। टीम ने तलाशी अभियान सभी घरों से बीजा, साल, हल्दू सहित अन्य प्रजाति की लकड़ी का 359 नग चिरान बरामद की है, जिसकी कीमत करीब 4 लाख 25 हजार रूपए आंकी गई है। मामले में वन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है।

वनमंडलाधिकारी प्रेमलता यादव को बालको वन परिक्षेत्र के सतरेंगा में अवैध वनोपज भंडारित होने की सूचना मिल रही थी। जिसे वनमंडलाधिकारी ने गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए। उनके निर्देश उप वनमंडलाधिकारी सूर्यकांत सोनी के मार्गदर्शन तथा बालको वन परिक्षेत्राधिकारी जयंत सरकार व नवपदस्थ रेंजर देवव्रत सिंहा के नेतृत्व में टीम सतरेंगा पहुंची। वन विभाग की टीम ने एक साथ गांव के छह घरों में दबिश दी। जिसमें एक सरकारी स्कूल के शिक्षक जगत निर्मलकर पिता तेजराम के अलावा महेत्तर सिंह पिता नान्ही श्रीवास, घांसीराम पिता रामसाय, लच्छीराम पिता उजियार साय , भगतराम पिता घांसीराम व एक अन्य ग्रामीण के घर शामिल थे। टीम मे शामिल अफसर व कर्मचारी उस वक्त आवाक रह गए, जब तलाशी के दौरान शिक्षक व ग्रामीणों के घर से लकड़ी का जखीरा बरामद हुआ। टीम ने शिक्षक के घर से साल, बीजा सहित अन्य प्रजाति के 254 नग चिरान बरामद किया, जबकि महेत्तर के घर से 73 नग चिरान, घांसी के घर से 18 नग, लच्छी के घर से दस व भगत के घर से चार नग चिरान बरामद हुआ। वन विभाग द्वारा जप्त लकड़ी चिरान की कुल तादाद 359 नग यानि 5.405 घनमीटर है, जिसकी कुल कीमत करीब 4 लाख 25 हजार आंकी गई है। गौरतलब है कि बालको वन परिक्षेत्र मे आने वाले ग्राम सतरेंगा की पहचान प्रदेश में पर्यटन स्थल के रूप में बनी हुई है। यहां प्रतिदिन दूर दूर से लोग प्रकृति की सुंदरता का लुत्फ उठाने पहुंचते हैं। यहां लगने वाली भीड़ की आड़ में तस्कर भी सक्रिय रहते हैं। बहरहाल मामले में वन विभाग द्वारा पेड़ की कटाई और चिरान तैयार कर तस्करी के मामले में आरोपियों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है।
तीन रेंज के 55 अधिकारी कर्मचारी रहे शामिल
डीएफओ श्रीमती यादव के निर्देश पर उपवनमंडाधिकारी सूर्यकांत सोनी ने कार्रवाई के लिए टीम गठित की। टीम में बालको, कोरबा व लेमरू वन परिक्षेत्र के अधिकारी कर्मचारी शामिल किए गए, जिसमें परिक्षेत्र सहायक बालको कांति कुमार कंवर, सुशील कुमार साहू अजगरबहार उत्तर, रामेश्वर सिदार बड़गांव, श्रवण गायकी लेमरू, ओमप्रकाश भारद्वाज दोंदरो, अनिल कंवर अजगरबहार दक्षिण सहित कुल 55 अधिकारी व कर्मचारी शामिल थे, जिन्होंने घंटों घरों की तलाशी लेते हुए चिरान बरामद किया।
वनकर्मी निहत्थे, तस्कर उठा रहे फायदा
जंगल के सुरक्षा की जिम्मेदारी वन कर्मियों के कंधे पर होती है। वे निहत्थे ही जंगल में गश्त करते हैं। इस दौरान वन्यजीवों के अलावा तस्करों से खतरा बना रहता है। कोरबा वनमंडल में लकड़ी तस्करों द्वारा वन कर्मियों पर हमले की घटना भी सामने आ चुकी है। इसके बावजूद सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नही है। इधर विभागीय कामकाज के अलावा कई अन्य कार्य भी वनकर्मियों के भरोसे है, जिसका सीधा असर जंगल की सुरक्षा पर पड़ता है। इसका फायदा लकड़ी तस्कर उठा रहे हैं।
